Product Information
Genre
Biographies, Diaries & True Accounts
Author Name
Shri Bhagwat Pariwar
About Author
Shri Bhagwat Pariwar is a devotional and spiritual organization rooted in the teachings of the Bhagavata Purana, a revered scripture in Hinduism focused on devotion to Lord Krishna. The “author” of Shri Bhagwat Pariwar is not a single individual in the traditional sense. Instead, it is a collective spiritual movement led and guided by saints, कथावाचक (religious storytellers), and devotees who promote the values of bhakti (devotion), moral living, and spiritual awareness through recitations of the Bhagwat Katha.
Code
9789352668106 (ISBN CODE)
No
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Product Description
ओ मेरे मन, इस पुण्यतीर्थ में हौले से जाग यह भारत, मानवता का पारावार है कोई नहीं जानता, किसके आह्वान पर जानें कितनी धाराएँ मनुष्यता की दुर्वार वेग से बहती हुई आई यहाँ खो गई इस महासमुद्र में जाने कौन-कौन आए, सब इसमें समाए कोई भी अलग नहीं, कोई विलग नहीं अब सब एक, एक अस्तित्व है मेरे ही भीतर है, सारे वे कोई मुझसे दूर नहीं, सब मेरे मीत हैं मेरे इस रक्त में सबका संगीत है गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के गीत की उपर्युक्त पंक्तियाँ भारत की सनातन संस्कृति और जीवन दर्शन को प्रतिबिंबित करती हैं, जिसमें हम अपने देश की अतुल्य, अप्रतिम और अनुपम जीवनदृष्टि को देख सकते हैं। आज के संदर्भ में उसको अधिक गहनता से, एक बड़े केनवास पर 41 हिंदी तथा अंग्रेजी के आलेखों के माध्यम से समझने और जानने का जिज्ञासा भाव ही ‘अप्रतिम भारत’ के प्रकाशन का उद्देश्य है। भारत की उस एकात्म तथा सर्वात्म जीवनदृष्टि को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए ग्रंथ का शुभारंभ भारत के योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद के पुण्य स्मरण से किया गया है। वर्ष 1893 में शिकागो के विश्वधर्म सम्मेलन में उनके संबोधन के 125 वर्ष पूर्ण होने की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विज्ञान भवन में युवा पीढ़ी को दिया गया व्याख्यान हम सबको ऊर्जा से भरेगा, ऐसा हमारा विश्वास है। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश तथा भारतीय मनीषा के गहन अध्येता श्री रमेश चंद्र लाहोटी, महामनीषी डॉ. विद्यानिवास मिश्र, प्रखर राजनेता एवं विचारक डॉ. मुरली मनोहर जोशी, सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं चिंतक प्रो. रमेश चंद्र शाह, भारतीय चिंतन परंपरा के अग्रणी व्याख्याता श्री कैलाश चंद्र पंत, इतिहासवेत्ता प्रो. रामेश्वर मिश्र ‘पंकज’, पुण्यश्लोक डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल, डॉ. राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी के विद्वतापूर्ण आलेखों में हमें आज के परिवेश में भारतीय जीवनदर्शन को समझने में सहायता मिलेगी। नारी विमर्श के अंतर्गत मध्यकाल से आज तक भारतीय नारी जीवन और सोच में आए बदलाव से रुबरु करा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वनाथ सचदेव। भारतीय राजनीति को एक नया दृष्टिबोध देनेवाले समाज चिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय के मुंबई में दिए गए व्याख्यान का पुनर्स्मरण हमारी युवा पीढ़ी को समाज परिवर्तन के लिए नए तरीके से सोचने को मजबूर करेगा। जीवन के अर्थ को बहुत ही गहनता से समझा रहा है, सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं गांधीवादी पत्रकार श्री अनुपम मिश्र का आलेख। अमेरिका से भारतीय विद्या की गहन अध्येता डॉ. मृदुल कीर्ति का उपनिषद् का हिंदी अनुवाद पाठकों को पुलकित करेगा और वाराणसी की साहित्य विदुषी श्रीमती नीरजा माधव का लेख भारतीय दर्शन एवं तत्वज्ञान के वैज्ञानिक पहलुओं से परिचित कराएगा। संस्कृति एवं कला विमर्श की दृष्टि से भारतीय संविधान में निवेशों के अभाव से परिचित करा रहे हैं मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग के मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव। प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित और डॉ. तंकमणि अम्मा के लेख हमें वर्तमान समय में सांस्कृतिक नीति तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों में आए बदलाव से अवगत करा रहे हैं, वहीं भारतीय कला-संगीत के मूल्यों के उजले पक्ष से परिचित करा रहे हैं विख्यात कला समीक्षक श्री नर्मदा प्रसाद उपाध्याय। वेदों पर श्री सुरेश चतुर्वेदी तथा श्री दीनानाथ चतुर्वेदी के भारतीय जीवन में चार के अंक का महत्त्व आपको पसंद आएँगे। साथ ही व्यक्ति के तन-मन पर भारतीय संगीत के असर से परिचित करा रही हैं, कहानीकार श्रीमती अल्का अग्रवाल सिग्तिया। डॉ. हंसा प्रदीप के लेख में आपको लोरी का शिशु पर पड़नेवाले प्रभावों की जानकारी मिलेगी। अंग्रेजी भाषा के खंड में 15 आलेख हैं, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का राष्ट्र को आह्वान का पुनर्स्मरण; प्रख्यात उद्योगपति अजीम प्रेमजी का राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा प्रणाली में आमूल परिवर्तन का आह्वान तथा डॉ. रवींद्र कुमार का नव-शिक्षा पर आलेख; श्री आर. चिदंबरम का प्राचीन विज्ञान तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी पर विद्वतापूर्ण आलेख; श्री रतन शारदा का भारतीय संस्कृति और आज की समस्या के निदान पर विचारोत्तेजक आलेख; सर्वश्री अमीष त्रिपाठी, शेफाली वैद्य, एच.सी. पारीख, संदीप सिंह तथा राजन खन्ना एवं कमला देवी चट्टोपाध्याय के जीवन के विविध पहलुओं पर आलेख सुधी पाठकों को भारतीय संस्कृति के विविध पक्षों से अवगत कराएँगे। डॉ. गौरी माहुलीकर तथा श्री नीरज चावला के आलेख आपको पर्यावरण, प्रकृति तथा पशु-पक्षियों के मनोरम जगत् से परिचित कराएँगे और डॉ. वरुण सूथरा का आलेख एक ऐसे व्यक्ति से परिचित कराएगा, जो भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। कुल मिलाकर ‘अप्रतिम भारत’ ग्रंथ आप सुधी पाठकों को भारतीय जीवन मूल्यों के अनछुए पहलुओं की गंगा में अवगाहन कराएगा, जिसमें सराबोर होकर आप स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करेंगे।