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9789390923922 (ISBN CODE)
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Ram Bahadur Rai is a noted Indian journalist, writer, and public intellectual known for his work in Hindi journalism. He has been associated with prominent publications and has written extensively on politics, society, and contemporary issues in India. Rai is especially respected for his analytical approach and commitment to ethical journalism. He has also been involved in academic and cultural institutions, contributing to discussions on media, democracy, and public life.
Product Description
यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संविधान के à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• सच, तथà¥à¤¯, कथà¥à¤¯ और यथारà¥à¤¥ की कौतूहलता का सजीव चितà¥à¤°à¤£ करती है। संविधान की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾, अवधारणा और उसका उलà¤à¤¾ इतिहास इसमें समाहित है। घटनाà¤à¤ इतिहास नहीं होतीं, उसके नायक इतिहास बनाते हैं। 1920 से महातà¥à¤®à¤¾ गांधी ने सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ आंदोलन की मà¥à¤–à¥à¤¯à¤§à¤¾à¤°à¤¾ का नेतृतà¥à¤µ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही सà¥à¤µà¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ को पà¥à¤¨à¤°à¥à¤ªà¤°à¤¿à¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ किया। फिर संविधान की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ को शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में उतारा। इस तरह संविधान की अवधारणा का जो विकास हà¥à¤†, उसके राजनीतिक नायक महातà¥à¤®à¤¾ गांधी हैं। वे संविधान सà¤à¤¾ के गठन, उसे विघटित होने से बचाने और सतà¥à¤¤à¤¾ हसà¥à¤¤à¤¾à¤‚तरण की हर पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अतà¥à¤¯à¤‚त सतरà¥à¤• हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हर मोड़ पर कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ को बौदà¥à¤§à¤¿à¤•, विधिक, राजनीतिक और नैतिक मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ दिया। संविधान के इतिहास से पता नहीं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚, इसे ओà¤à¤² किया गया है। गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤µà¤¿à¤² ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ ने जो सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ दी, उसके विपरीत इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में महातà¥à¤®à¤¾ गांधी की नेतृतà¥à¤µà¤•ारी à¤à¥‚मिका का पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• विवरण है। पंडित नेहरू बड़बोले नेता थे। खंडित चितà¥à¤¤ से उनका वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ विरोधाà¤à¤¾à¤¸à¥€ था। संविधान के इतिहास में वह दिखता है। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में उसके तथà¥à¤¯ हैं कि कैसे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने कहे से बार-बार अनेक कदम पीछे हटना पड़ा जब 1945 से 1947 के दौरान बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ सरकार से समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ हो रहे थे। सरदार पटेल ने मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को सहमत कराकर पृथकॠनिरà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को समापà¥à¤¤ कराया, जिससे संविधान सांपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤•ता से मà¥à¤•à¥à¤¤ हो सका। इसे कितने लोग जानते हैं! डॉ. à¤à¥€à¤®à¤°à¤¾à¤µ आंबेडकर ने उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤•ा में बंधà¥à¤¤à¤¾ का समावेश कराया। डॉ. राजेंदà¥à¤° पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ ने संविधान सà¤à¤¾ का à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ उन à¤à¤‚à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¤à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ विचलित होने नहीं दिया। संविधान की नींव में जो पतà¥à¤¥à¤° लगे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेनेगल नरसिंह राव ने लगाया, जिस पर इमारत बनी। उस इतिहास में à¤à¤• पनà¥à¤¨à¤¾ 'राजदà¥à¤°à¥‹à¤¹ धाराओं की वापसी' का à¤à¥€ है, जिसे असंवैधान