Product Information
9789353225797 (ISBN CODE)
{" of Pages":"528 pages"}
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के अधà¥à¤¯à¥‡à¤¤à¤¾ और संसà¥à¤•ृत à¤à¤¾à¤·à¤¾ के विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥ शà¥à¤°à¥€ सूरà¥à¤¯à¤•ानà¥à¤¤ बाली ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हिंदी दैनिक अखबार ‘नवà¤à¤¾à¤°à¤¤ टाइमà¥à¤¸â€™ के सहायक संपादक (1987) बनने से पहले दिलà¥à¤²à¥€ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ किया। नवà¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ संपादक (1994-97) रहने के बाद वे जी नà¥à¤¯à¥‚ज के कारà¥à¤¯à¤•ारी संपादक रहे। विपà¥à¤² राजनीतिक लेखन के अलावा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति पर इनका लेखन खासतौर से सराहा गया। काफी समय तक à¤à¤¾à¤°à¤¤ के मील पतà¥à¤¥à¤° (रविवारà¥à¤¤à¤¾, नवà¤à¤¾à¤°à¤¤ टाइमà¥à¤¸) पाठकों का सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• पसंदीदा कॉलम रहा, जो परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ परिवरà¥à¤§à¤¨à¥‹à¤‚ और परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के साथ ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤—ाथा’ नामक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के रूप में पाठकों तक पहà¥à¤à¤šà¤¾à¥¤ 9 नवंबर, 1943 को मà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤¨ (अब पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨) में जनमे शà¥à¤°à¥€ बाली को हमेशा इस बात पर गरà¥à¤µ की अनà¥à¤à¥‚ति होती है कि उनके संसà¥à¤•ारों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने में उनके अपने संसà¥à¤•ारशील परिवार के साथ-साथ दिलà¥à¤²à¥€ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के हंसराज कॉलेज और उसके पà¥à¤°à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° शांतिनारायण का निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• योगदान रहा। इसी हंसराज कॉलेज से उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बी.à¤. ऑनरà¥à¤¸ (अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€), à¤à¤®.à¤. (संसà¥à¤•ृत) और फिर दिलà¥à¤²à¥€ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से ही संसà¥à¤•ृत à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤µà¤¿à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ में पी-à¤à¤š.डी. के बाद अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨-अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ और लेखन से खà¥à¤¦ को जोड़ लिया। राजनीतिक लेखन पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ दो पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों—‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ की राजनीति के महापà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨â€™ तथा ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की पहचान’ के अलावा शà¥à¤°à¥€ बाली की à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾ पर तीन पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें—‘Contribution of Bhattoji Dikshit to Sanskrit Grammar (Ph.D. Thisis)’, ‘Historical and Critical Studies in the Atharvaved (Ed)’ और महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘महाà¤à¤¾à¤°à¤¤à¤ƒ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤ªà¤¾à¤ ’ पà¥à¤°à¤•ाशित हैं। शà¥à¤°à¥€ बाली ने वैदिक कथारूपों को हिंदी में पहली बार दो उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया—‘तà¥à¤® कब आओगे शà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¾â€™ तथा ‘दीरà¥à¤˜à¤¤à¤®à¤¾â€™à¥¤ विचारपà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ को समà¤à¤¨à¥‡ की शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚’ और ‘महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का धरà¥à¤®à¤¸à¤‚कट’ ने विमरà¥à¤¶ का नया अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठकिया।
Product Description
‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ की राजनीति का उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤¯à¤£â€™, जैसा कि पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के शीरà¥à¤·à¤• से ही सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है, à¤à¤• राजनीतिक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• है। कोई à¤à¥€ राजनीतिक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• राजनीतिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है अथवा राजनीति से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µà¥‹à¤‚ पर आधारित हो सकती है या फिर राजनीतिक विचारधारा से, राजनीतिक विचारों से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हो सकती है। यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• तीसरे वरà¥à¤— में रखी जा सकती है, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ ‘उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤¯à¤£â€™ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• विचारधारा पर आधारित राजनीतिक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ की विचारधारा से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कोई राजनीतिक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• हो और वह à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के धरà¥à¤® और à¤à¤¾à¤°à¤¤ के संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ से न जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हो, à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अपनी निगम-आगम-कथा परंपराओं से न जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हो, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®-अदà¥à¤µà¥ˆà¤¤-à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿, अपने इन तीन वैचारिक आंदोलनों से न जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हो, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के तीन विशिषà¥à¤Ÿà¤¤à¤® महरà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, जो संयोगवश तीनों ही दलित महरà¥à¤·à¤¿ हैं, à¤à¤¸à¥‡ वालà¥à¤®à¥€à¤•ि, वेदवà¥à¤¯à¤¾à¤¸ तथा सूतजी महाराज से न जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हो, तो फिर वह à¤à¤¾à¤°à¤¤ की विचारधारा पर आधारित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• कैसे कही जा सकती है? ‘उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤¯à¤£â€™ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की इसी, दस हजार सालों से विकसित अपनी, देश की अपनी विचारधारा से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• है, देश के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®-धरà¥à¤®-संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ से अनà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• है। निगम, आगम, कथा इन तीनों परंपराओं से जीवन-रस पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने वाली तथा à¤à¤¾à¤°à¤¤ केतीन वैचारिक आंदोलनों, अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®-अदà¥à¤µà¥ˆà¤¤-à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आंदोलनों से पोषण पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने वाली शबà¥à¤¦-पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ है, उसी से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ विचारधारा का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ करती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ की विचारधारा पर आधारित इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के केंदà¥à¤° में ‘हिंदà¥à¤¤à¥à¤µâ€™ है, जो पिछले दस हजार साल से à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अपनी विचारधारा है और इस विचारधारा के केंदà¥à¤° में है ‘हिंदू’, जिसको लेखक ने इन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ किया है कि ‘हिंदू वह है, जो पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¨à¥à¤® मानता है’। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के बीच हà¥à¤ संघरà¥à¤· को ढंग से समà¤à¤¨à¥‡ की कोशिश करनी है तो वह काम गंगा-जमनी सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ जैसे ढकोसलों से परिपूरà¥à¤£ शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ से नहीं हो सकता। à¤à¤¾à¤°à¤¤ को बार-बार तोड़नेवाली विधरà¥à¤®à¥€ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विवरणों पर खडि़या पोत देने से à¤à¥€ काम नहीं चलनेवाला। ‘इसलाम शांति का मजहब है’ जैसी निररà¥à¤¥à¤• बतकहियों से à¤à¥€ कोई बात नहीं बननेवाली। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¤à¥€ मà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤® निसà¥à¤¸à¤‚देह à¤à¤¾à¤°à¤¤ की ही संतानें हैं। हम इतिहास में दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¿à¤¤ सà¤à¥€ इसलाम पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¿à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤-विà¤à¤¾à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से मà¥à¤•à¥à¤¤ अखंड à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· की बात कर रहे हैं। पारसीक (फारस), शकसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ (सीसà¥à¤¤à¤¾à¤¨), गांधार (अफगानिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨), सौवीर (बलोचिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨), सपà¥à¤¤à¤¸à¤¿à¤‚धॠ(पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨), सिंधà¥à¤¦à¥‡à¤¶ (सिंध), कà¥à¤°à¥à¤œà¤¾à¤‚गल (वजीरिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨), उतà¥à¤¤à¤°à¤•à¥à¤°à¥ (गिलगित-बलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨), काशà¥à¤®à¥€à¤° (पी.ओ.के.), पूरà¥à¤µ बंग (बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶) आदि सà¤à¥€ इसलाम पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ विà¤à¤¾à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ से पूरà¥à¤µ के à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· की बात कर रहे हैं। à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· के सà¤à¥€ मà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤® à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ की ही संतानें हैं, हिंदू दादा-परदादाओं की ही संतानें हैं, इसलामी जड़ोंवाले देशों से वे यहाठनहीं आठहैं। इतिहास में की गई जोर-जबरदसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, पà¥à¤°à¤²à¥‹à¤à¤¨à¥‹à¤‚, उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨à¥‹à¤‚ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प यहाठआतंक का माहौल बनाकर इसलामी व ईसाई धरà¥à¤®à¤¾à¤‚तरण में धकेल दिठगठहैं। ये सà¤à¥€ धरà¥à¤®à¤¾à¤‚तरित वासà¥à¤¤à¤µ में हिंदू ही हैं—इस, यानी इसी इतिहास के धरातल पर लिखे अमिट सतà¥à¤¯ को सà¥à¤µà¥€à¤•ारने में, अपने पिता, दादा, परदादाओं के धरà¥à¤®, शिकà¥à¤·à¤¾-दीकà¥à¤·à¤¾, संसà¥à¤•ारों व परंपराओं में फिर से मिलकर घà¥à¤²-मिल जाने में ही समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के समाधान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो सकते हैं। शà¥à¤°à¥‚ की दो-à¤à¤• पीढि़यों को कà¥à¤› मानसिक, वैचारिक, सामाजिक सवालों व तनावों का सामना करना पड़ सकता है। पर वहीं से समाधानों का अकà¥à¤·à¤¯ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ à¤à¥€ फूटेगा। जाहिर है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ का अपना जीवन-दरà¥à¤¶à¤¨, à¤à¤¾à¤°à¤¤ का अपना धरà¥à¤®, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अपने संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अपने परà¥à¤µ-तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°, à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अपनी सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾, à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अपनी à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤, à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अपनी विचारधारा ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ की राजनीति के उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤¯à¤£ की पटकथा लिखनेवाले हैं। लिखना शà¥à¤°à¥‚ à¤à¥€ कर चà¥à¤•े हैं।