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9789350482711 (ISBN CODE)
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Bal Gangadhar Tilak (often respectfully called “Sri Tilakâ€) was a prominent Indian freedom fighter, social reformer, and writer. Born in 1856 in Maharashtra, he was one of the first leaders to demand complete independence (Swaraj) from British rule.
Product Description
दà¥à¤¬à¤²à¥‡-पतले शरीर में कैद à¤à¤• बहà¥à¤¤ बड़ी हसà¥à¤¤à¥€, पद की लालसा से मà¥à¤•à¥â€à¤¤, पैसे के पà¥à¤°à¤²à¥‹à¤à¤¨ से परे और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤ ा की पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से कहीं ऊपर; लेखक, पतà¥à¤°à¤•ार, राजनीतिजà¥à¤ž, शिकà¥à¤·à¤•, वकà¥â€à¤¤à¤¾, संगठनकरà¥à¤¤à¤¾, à¤à¤• छटपटाती आतà¥à¤®à¤¾, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ के लिठसंघरà¥à¤· में सà¥à¤– अनà¥à¤à¤µ करनेवाले; à¤à¤• समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ जीवन, जो आदरà¥à¤¶ के लिठजिया और आदरà¥à¤¶ की वेदी पर कà¥à¤°à¤¬à¤¾à¤¨ हो गया। गणेशशंकर विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ à¤à¤• बहà¥à¤®à¥à¤–ी वà¥à¤¯à¤•à¥â€à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ, जिसका काम था देशवासियों को जगाना, शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करना, लामबंद करना, आजादी की लड़ाई में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आगे बढ़ाना, पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करना और ललकारना। संघरà¥à¤· उसका पेशा था और जन-साधारण उसका हथियार। अपने आदरà¥à¤¶ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤à¤¿ में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¤à¥€ कठमà¥à¤²à¥à¤²à¤¾à¤ªà¤¨ नहीं बरता। उनका दरवाजा अहिंसावादियों और कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारियों दोनों के लिठसमान रूप से अंत तक खà¥à¤²à¤¾ रहा। गà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€, अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯, असमानता, शोषण, छà¥à¤†à¤›à¥‚त, सामंती अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° आदि के खिलाफ संघरà¥à¤· में ईमानदारी के साथ जूà¤à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¤¾ हर सिपाही उनका अपना था, à¤à¤²à¥‡ ही उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपनाये गठसंघरà¥à¤· के तौर-तरीके उनसे मेल न खाते हों। बहà¥à¤®à¥à¤–ी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ से संपनà¥à¤¨ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€à¤œà¥€ के वà¥à¤¯à¤•à¥â€à¤¤à¤¤à¥à¤µà¤¿ के बहà¥à¤¤ से रूप थे और हर रूप हर छवि दूसरी से बढ़कर थी—आकरà¥à¤·à¤• और लà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¥€à¥¤ अपने जीवन में अपनी ही कलम से अपने अलग-अलग रूपों को समय-समय पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पाठकोंके सामने जिस शकà¥à¤² में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया था, उनको बटोरकर उस चयन से जो कà¥à¤› बन पाया, वह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ है।