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Rashtriya Swayamsevak Sangh: Aham Se Vayam Ki Yatra

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Final Price inclusive of all taxes

size

22 x 14 x 2 cm

Product Information

Genre

Politics

Code

9789347014932 (ISBN CODE)

No

{" of Pages":"400 pages"}

Author Name

Sameer Chougaonkar

About Author

समीर चौगांवकर प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय । मात्र 28वें साल में ग्रामीण प्रबंधन पर लिखी गई पुस्तक जीवाजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हुई। महाराष्ट्र में शिवसेना में हुई बगावत और सत्ता-परिवर्तन पर लिखी गई पुस्तक 'ऑपरेशन शिवसेना : तख्तापलट से सत्ता तक' चर्चित पुस्तक है। दूसरी पुस्तक 'लुटियन की लीला' राजनीतिक दल, राजनीतिज्ञ और लोकतंत्र को जिंदा रखने वाली संस्थाओं एवं उनसे जुड़ी राजनीति को केंद्र में रखकर लिखे गए लेखों का संग्रह है। चौथी पुस्तक 'आपातकाल और 1977 के चुनाव में इंदिरा की हार' में आपातकाल और उसके बाद हुए चुनाव पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती है। राजनीति पर लिखी हुई खबरें और लेख देश की प्रतिष्ठित पत्रिका 'इंडिया टुडे' के साथ ही प्रतिष्ठित दैनिक समाचार-पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुए। 'एशिया टाइम्स' और एशिया की अन्य विदेशी न्यूज एजेंसियों के लिए भारत की राजनीति पर लिखने का लंबा अनुभव है। देश के सभी बड़े न्यूज चैनलों पर राजनीति पर चर्चा और विश्लेषण तथ्यों के साथ करने के कारण समीर चौगांवकर एक जाना-पहचाना और विश्वसनीय नाम है।

Material

Paperback

Ideal for

Unisex

Country Of Origin

India

Product Description

1925 'में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी 100 साल की गौरवपूर्ण यात्रा में तमाम उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद देश के हर क्षेत्र व समाज के हर आयाम को स्पर्श किया है। संघ व्यक्ति-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण का विराट् उद्देश्य लेकर चला और इसके लिए संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने जो कार्य-पद्धति चुनी, वह थी नित्य-नियमित चलने वाली शाखाएँ। संघ शाखा का स्थान एक ऐसी प्रेरणाभूमि है, जहाँ से स्वयंसेवक की अहं से वयं की यात्रा प्रारंभ होती है। संघ की शाखाएँ व्यक्ति और चरित्र-निर्माण की यज्ञवेदी हैं। इस पुस्तक में संघ के अहं से वयं की यात्रा को विस्तार से बताने की कोशिश की गई है। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन, उनके संघर्ष और संघ की स्थापना, गुरुजी गोलवलकर का संघ के विस्तार में योगदान और संघ पर प्रथम प्रतिबंध लगने के बाद गुरुजी के नेहरू और पटेल के साथ पत्राचार के बाद संघ संविधान के निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह पुस्तक समाज को संघ से अवगत कराएगी। तीस साल संघ को करीब से देखने के बाद संघ की सौ साल की यात्रा पर यह पुस्तक लिखी गई है। विश्वास है कि यह पुस्तक संघ के 'राष्ट्र सर्वोपरि' के मूलमंत्र की अवधारणा को समाज में गहराई तक रेखांकित करेगी और विराट् संघ-कार्य का दिग्दर्शन करवाएगी।
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