GANESHSHANKAR_VIDYARTHI_(VOL_2)
GANESHSHANKAR_VIDYARTHI_(VOL_2)
GANESHSHANKAR_VIDYARTHI_(VOL_2)__undefined__undefined
GANESHSHANKAR VIDYARTHI (VOL 2)

₹999

₹5,000

80% Off

Biggest Sale of the Year!

0H:0M:0S

View Available Offers

Final Price inclusive of all taxes

Cash on Delivery

Get it delivered in 3-7 days

size

20 x 14 x 4 cm

Product Information

Genre

Indian Writing


Author Name

Sri Tilak


About Author

Bal Gangadhar Tilak (often respectfully called “Sri Tilak”) was a prominent Indian freedom fighter, social reformer, and writer. Born in 1856 in Maharashtra, he was one of the first leaders to demand complete independence (Swaraj) from British rule.


Material

Paperback


Ideal for

Unisex


Code

9789350482728 (ISBN CODE)


No

{" of Pages":"472 pages"}


Country Of Origin

India

Product Description

दुबले-पतले शरीर में कैद एक बहुत बड़ी हस्ती, पद की लालसा से मुक्‍त, पैसे के प्रलोभन से परे और प्रतिष्‍ठा की प्यास से कहीं ऊपर; लेखक, पत्रकार, राजनीतिज्ञ, शिक्षक, वक्‍ता, संगठनकर्ता, एक छटपटाती आत्मा, न्याय के लिए संघर्ष में सुख अनुभव करनेवाले; एक समर्पित जीवन, जो आदर्श के लिए जिया और आदर्श की वेदी पर कुरबान हो गया। गणेशशंकर विद्यार्थी एक बहुमुखी व्यक्‍तित्व, जिसका काम था देशवासियों को जगाना, शिक्षित करना, लामबंद करना, आजादी की लड़ाई में उन्हें आगे बढ़ाना, प्रोत्साहित करना और ललकारना। संघर्ष उसका पेशा था और जन-साधारण उसका हथियार। अपने आदर्श की प्राप्‍ति में उन्होंने कभी कठमुल्लापन नहीं बरता। उनका दरवाजा अहिंसावादियों और क्रांतिकारियों दोनों के लिए समान रूप से अंत तक खुला रहा। गुलामी, अन्याय, असमानता, शोषण, छुआछूत, सामंती अत्याचार आदि के खिलाफ संघर्ष में ईमानदारी के साथ जूझनेवाला हर सिपाही उनका अपना था, भले ही उसके द्वारा अपनाये गए संघर्ष के तौर-तरीके उनसे मेल न खाते हों। बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न विद्यार्थीजी के व्यक्‍तत्वि के बहुत से रूप थे और हर रूप हर छवि दूसरी से बढ़कर थी—आकर्षक और लुभावनी। अपने जीवन में अपनी ही कलम से अपने अलग-अलग रूपों को समय-समय पर उन्होंने पाठकोंके सामने जिस शक्ल में प्रस्तुत किया था, उनको बटोरकर उस चयन से जो कुछ बन पाया, वह पुस्तक प्रस्तुत है।