Jeevan_Gita:_Bhagavadgita_Mein_Jyotish_Vigyan_(Set_of_Volume_1_&_2)
Jeevan_Gita:_Bhagavadgita_Mein_Jyotish_Vigyan_(Set_of_Volume_1_&_2)
Jeevan_Gita:_Bhagavadgita_Mein_Jyotish_Vigyan_(Set_of_Volume_1_&_2)__undefined__undefined
Jeevan Gita: Bhagavadgita Mein Jyotish Vigyan (Set of Volume 1 & 2)

₹1,800

₹7,400

75% Off

Biggest Sale of the Year!

0H:0M:0S

View Available Offers

Final Price inclusive of all taxes

Cash on Delivery

Get it delivered in 3-7 days

size

2 x 14 x 22 cm

Product Information

Genre

Religion & Spirituality


Author Name

Dr. Arun Kumar Jaiswal


About Author

डॉ. अरुण कुमार जायसवाल—एक प्रेरक व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी जीवन-साधना से अपने क्षण-प्रति-क्षण के जीवन में यह प्रमाणित किया है कि जीवन का अर्थ ‘मर्म एवं दर्शन-साधनों’ में नहीं, साधना में है। डॉ. जायसवाल की जीवन साधना उन्हीं की भाँति बहुआयामी है। वैदिक संस्कृति, ज्योतिष विज्ञान, भारतीय दर्शन—इन्हीं में से कुछ है। उनका नाम, उनका परिचय ही इस ग्रंथ का भी परिचय है। निष्काम कर्म- अनासक्त जीवन-साधनाशील जीवनयात्रा, जो नित सोपानों एवं आयामों की ओर निरंतर गतिशील है। उसका यथार्थ परिचय तो बस उनसे मिलनेवालों एवं प्रेरित होनेवालों की अनुभूतियों में पहचाना जा सकता है। उनसे परिचित होने का सुगम साधन भी यही है।


Material

Paperback


Ideal for

Unisex


Code

9789355212283 (ISBN CODE)


No

{" of Pages":"1369 pages"}


Country Of Origin

India

Product Description

डॉ. अरुण कुमार जायसवाल—एक प्रेरक व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी जीवन-साधना से अपने क्षण-प्रति-क्षण के जीवन में यह प्रमाणित किया है कि जीवन का अर्थ ‘मर्म एवं दर्शन-साधनों’ में नहीं, साधना में है। डॉ. जायसवाल की जीवन साधना उन्हीं की भाँति बहुआयामी है। वैदिक संस्कृति, ज्योतिष विज्ञान, भारतीय दर्शन—इन्हीं में से कुछ है।श्रीमद्भगवद्गीता के वे न केवल तत्त्वदर्शी विज्ञाता हैं बल्कि इसमें वर्णित साधना विधियों के वे लोकोत्तर व रहस्यदर्शी साधक हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता की रचना को प्रकट करनेवाले महर्षि कृष्णद्वैपायन, जिन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है और इसका दिव्य गायन करनेवाले विश्वात्मा भगवान् कृष्ण, दोनों को ही तत्त्वत: आत्मसात् करने में सफलता पाई है। डॉ. अरुण ने अपने इस ग्रंथ में स्वयं के हृदय की अनुभूतियों को अक्षरों में पिरोया है। जैसे भगवान् सूर्य के सारथी अरुण सूर्यदेव के प्रकाश से संसार का परिचय कराते हैं, कुछ इसी तरह से डॉ. अरुण ने भी भगवद्गीता के ज्ञानसूर्य का अपनी जीवन-चेतना एवं जीवन-साधना से इस ग्रंथ के माध्यम से परिचय दिया है। उनके इस ग्रंथ में पूर्ववर्ती आचार्यों एवं मनीषियों के परंपरागत दर्शन-ज्ञान के साथ ज्योतिष विज्ञान के मर्म का भी समन्वय व प्राकट्य है।